Monday, 27 June 2016

अस्थमा के मरीज हैं तो बारिश से रहें सावधान, जानिए क्यों

यूं तो किसी भी बिमारी को छोटा या नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, लेकिन अस्थमा यानि कि दमा एक ऐसी ​बिमारी है जिसका रोग लगते ही व्यक्ति मौत को भी खुशी—खुशी गले लगाने को तैयार हो जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि दमा श्वसन तंत्र की बिमारी है। जिसके चलते व्यक्ति को ना सिर्फ सांस लेने में दिक्कत होती है बल्कि कई बार उसे खून की उल्टियां भी हो जाती हैं। ऐसे में अस्थमा के मरीजों के लिए कई तरह के परहेज तय हैं जिनमें से बारिश से बचकर रहना सबसे ज्यादा जरूरी है।

मानसून आने में अब ज्यादा वक्त नहीं रह गया है। लेकिन इस मानसून की शुरुआती बारिश में भीगना अस्थमा के मरीजों के लिए अभिश्राप साबित हो सकता है। ऐसे मौसम में भीगने से अस्थमा के मरीजों के सांस लेने में दिक्कतें और अटैक के अधिक मामले सामने आते हैं। लेकिन ऐसे मौसम में अस्थमा के मरीज इन उपायों को अपनाकर स्वस्थ रह सकते हैं


हमेशा नाक से सांस लें
बारिश या फिर ठंड के मौसम में अस्थमा के मरीजों को खासतौर पर मुंह के बजाय नाक से सांस लेनी चाहिए। इसका कारण यह है कि मुंह से सांस लेने पर ठंड भीतर जाती है। जबकि नाक से सांस लेने पर हवा फेफड़ों तक पहुंचने से पहले गर्म हो जाती है। ऐसे में अस्थमा के मरीज बारिश या ठंड के मौसम में नाक से सांस लें।

घर को साफ रखें
अस्थमा के मरीजों के लिए अनिवार्य है कि वह जिस वातावरण में रहें वह पूरी तरह से साफ हो। ऐसे मरीजों के कमरों में ज्यादा सजावट का सामान नहीं होनी चाहिए। ताकि उन पर धूल ना जम सके। क्योंकि जरा भी धूल अस्थमा के मरीजों के लिए एलर्जी और अटैक का कारण बन सकती है।


शांत रहे और व्यायाम करें
दमा के मरीजों को अक्सर शांत रहने की सलाह दी जाती है। ऐसे मरीज ना ही ज्यादा बोले और ना ही कानाफूसी में ध्यान दें। क्योंकि इससे तनाव होता है और अस्थमा के मरीजों के लिए तनाव खतरनाक साबित हो सकता है। इसलिए अस्थमा के मरीज खुद को शांत रखने के लिए योग, व्यायाम और ध्यान करें।

इनहेलर साथ रखें
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अस्थमा के मरीज इनहेलर को हमेशा अपने साथ रखें। बारिश या ठंड के मौसम में ऐसे मरीजों को अधिकतर सांस लेने में दिक्कत होती है। जिसके चलते घर से बाहर निकलने से पहले कम से कम 2 से 3 बार इनहेलर का इस्तेमाल करें।

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