Thursday, 28 July 2016

#ORSDAY : अक्सर डायरिया बनता है शिशुओं की मौत का कारण!


आज अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर #ORSDAY मनाया जा रहा है। इन खास दिन को मनाने का मकसद शिशुओं को कुपोषण और डायरिया की चपेट से बचाना और समाज में जागरुकता फैलाना है। दरअसल, जब शरीर में पानी और लवण की कमी होने लगती है तो डायरिया हो जाता है। यह इतना भयानक रोग है जो अगर एक बार बिगड़ गया तो इससे सीधा शिशु की मौत हो जाती है। डायरिया अक्सर 5 साल की उम्र से कम के शिशुओं को होता है।

बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए सिर्फ प्रोटीओमेगा

पोषक तत्वों का अभाव
डायरिया अक्सर उन शिशुओं को होता है जिनकी मां गर्भावस्था के दौरान अपने आहार में पर्याप्त प्रोटीन, आयरन, फाइबर और अन्य पोषक तत्व लेने से परहेज करती हैं। जिसके चलते शिशुओं का सम्पूर्ण विकास नहीं हो पाता और वह पैदा होते ही डायरिया जैसे जानलेवा बीमारी की चपेट में आ जाते हैं। डायरिया चार तरह का होता है। क्रॉनिक डायरिया, एक्यूट इंटरेटाइटिस, गैस्टरोइंटरेटाइटिस और डिसेंट्री।


डायरिया अक्सर बरसात के मौसम में होता है। क्योंकि ऐसे मौसम में साफ सफाई का अभाव रहता है और गंदगी डायरिया होने का सबसे बड़ा कारण है। डा​यरिया होने का एक बड़ा कारण अज्ञानता का अभाव भी है। ज्यातादार लोगों को यह पता ही नहीं होता कि शिशुओं को पैदा होते ही दस्त और उल्टियां होने के क्या कारण हैं? जिसके चलते कई बार ऐसा होता है कि अभिभावक डायरिया के लक्षणों और कारणों को समझने के अभाव में अपने बच्चे को खो देते हैं। तो आइए हम आपको बताते हैं डायरिया के लक्षण, कारण और इससे बचाव।

क्या आप भी अक्सर कमजोरी और थकान महसूस करते हैं?

डायरिया होने के कारण
1) शरीर में पानी की कमी
2) गंदा पानी पीना
3) साफ-सफाई का अभाव
4) आंत की गड़बड़ी
5) खाने में प्रोटीन और पोषक तत्वों का अभाव
6) ज्यादा तैराकी करना
7) पाचन तंत्र कमजोर होना
8) किसी दवाई से रिएक्शन होना


डायरिया के लक्षण
1) जल्दी-जल्दी दस्त आना
2) पेट में दर्द होना
3) पेट में कुछ घूमने जैसा महसूस करना
4) उल्टी आना
5) चक्कर आना
6) तेज बुखार होना
7) कमजोरी महसूस होना
8) चिड़चिड़ा महसूस होना

मानसून में बढ़ती है कमजोरी, ऐसे बढ़ाएं ताकत

डायरिया से बचाव
ठंड से बचाव ना होने पर बच्चों को जल्दी डायरिया हो जाता है। ऐसी स्थिति में अगर बच्चों को तुंरत अच्छे अस्पताल ले जाया जाए स्थिति पर काबू पाया जा सकता है। इसके साथ बच्चे और मां दोनों का साफ रहना भी बहुत जरूरी है। शुरुआती 1 साल ​तक शिशुओं का सिर्फ मां का दूध पिलाएं। इसके बाद अगर बच्चा कुछ खाता है तो ध्यान रखें कि वह प्रोटीन और पोषक तत्वों से लैस हो। इस बात का जरूर ध्यान रखें कि बच्चे की शरीर में किसी की कीमत पर पानी की कमी नहीं होनी चाहिए। ऐसी स्थिति में डीहाईड्रेशन होने के चांस होते हैं।

0 comments:

Post a Comment