Saturday, 23 July 2016

बच्चों में तेज दिमाग के लिए अपनाएं प्रोटीओमेगा,क्योंकि...


​हम जो भी खाते हैं उसका सीधा असर हमारे मस्तिष्क पर पड़ता है। खासतौर से तब जब कोई महिला गर्भवती हो। गर्भावस्था के दौरान मां की हर गतिविधी से शिशु प्रत्यक्ष तौर पर जुड़ा होता है। इसलिए डॉक्टर सलाह देते हैं कि शिशु के बेहतर विकास के लिए अपने आहार में प्रोटीन और ओमेगा-3,6 को शामिल करें। नवजात शिशु के अलावा भी 15 साल तक के बच्चों को हर हाल में प्रोटीन+ओमेगा का भरपूर सेवन कराना चाहिए।

मस्तिष्क के लिए क्यों फायदेमंद हैं ओमेगा
ओमेगा-3 और 6 ऐसा फैटी एसिड होता है जिसका बौद्धिक क्षमता से गहरा संबंध होता है। वैसे तो ओमेगा मछली, अखरोट, अलसी के बीज, सरसों के बीज, सोयाबीन, स्प्राउट्स, टोफू, गोभी, हरी बीन्स, ब्रोकली, हरी पत्तेदार सब्जियों आदि में पाया जाता है, लेकिन डॉ जी वेलनेस का प्रोटीओमेगा प्रोटीन और ओमेगा—3 व 6 से भरपूर ऐसा सप्लीमेंट है जिसके नियमित सेवन से ना सिर्फ बच्चों में दिमाग बढ़ता है बल्कि उनकी सोचने की क्षमता भी बढ़ती है।


क्योंकि प्रोटीओमेगा में ओमेगा प्रचुर मात्रा में शामिल है इसलिए इस पाउडर सप्लीमेंट को दूध, पानी या किसी शेक्स का साथ लेने से बच्चे का आईक्यू लेवल काफी तेज होता है। गर्भवती महिला को प्रोटीओमेगा अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। इसलिए अच्छे स्वास्थ्य के लिए ओमेगा-6 और ओमेगा-3 का संतुलन बना रहना बेहद ज़रूरी होता है।

विशेष उदाहरण
ओमेगा-3 और 6 एक बेहतर और स्वस्थ दिमाग के लिए किस तरह महत्वपूर्ण है हम आपको यहां एक उदाहरण के माध्यम से समझाते हैं। जब हम कोई फोन खरीदते हैं तो हम सबसे पहले यह पूछते हैं कि उसमें रैम कितनी है। क्योंकि फोन में जितनी रैम होगी वह उतनी जल्दी हमारी फाइल को खोलेगा।


उसी तरह से ओमेगा (प्रोटीओमेगा) भी हमारे दिमाग में रैम की तरह काम करता है। इसका नियमित सेवन करने से बच्चों का दिमाग कच्ची उम्र में ही तेज हो जाता है। इसीलिए प्रोटीओमेगा को बचपन में ज्यादा से ज्यादा सेवन करने की सलाह दी जाती है।

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