Tuesday, 5 July 2016

इस ईद यें ना करें, हो सकता है त्यौहार खराब

ईद का त्यौहार मुस्लिम समुदाय के लोगों का सबसे बड़ा त्यौहार होता है। रमजान के पाक महीने के बाद मुस्लिम समाज ईद-उल-फितर जैसे त्यौहार को बड़ी ही ​पवित्रता के साथ मनाता है। इस दिन मुस्लिम जाति के लोग खुशी में झूमकर एक दूसरों को गले लगाते हैं और मीठी सेवइयां से एक दूसरे का मुंह मीठा कर शुभकामनाएं देते हैं। इस साल भी 7 जुलाई को इसी तरह ईद मनाई जानी है।

लेकिन इस दिन हम खुशी में इतने मश्गूल हो जाते हैं कि अपने स्वास्थ्य को पीछे छोड़ देते हैं। जिसके चलते हमारी जरा सी लापरवाही ऐसे खास मौकों को निरस कर देती है। इसलिए इस ईद हमें अपनी हेल्थ पर विशेष रूप से ध्यान देना है। जिनके कुछ तरीके इस प्रकार हैं—



साफ-सफाई रखें



कहते हैं जहां साफ-सफाई होती है देवता वहीं वास करते हैं। इसलिए अगर आप भी चाहते हैं कि इस ईद अल्लाह आपके घर आएं और आपसे प्रसन्न हों तो उसके लिए आपको अपने घर और आसपास के एरिया को एकदम साफ रखना होगा। इसका प्रत्यक्ष रूप से असर हमारे स्वास्थ्य पर भी पड़ेगा। अक्सर त्यौहारों के मौके पर अब रिश्तेदारों और परिवार के सदस्यों के इतना खो जाते हैं कि साफ-सफाई का मौका नहीं मिलता। इसलिए हमें अभी से सफाई की जरूरत है।



बाजार से सेवइयां ना लाए



बाजार से मिलने वाली सेवइंयों और घर में बनाई जाने वाली सेवइंयों में धरती-आसमान का फर्क होता है। घर में बनाया हुआ कोई भी पकवान साफ और ताजा होता है जबकि बाजार से मिलने वाले पकवान अधिकतर बासी और अशुद्ध होते हैं। खासतौर से मीठे पकवान। क्योंकि उन पर मक्खी-मच्छर ज्यादा बैठते हैं। बावजूद इसके हम लोग फ्री रहने और आलस्य के चलते बाहार से ही पकवान ले आते हैं। जिसके चलते हम खुद बीमारियों को न्यौता देते हैं। इसलिए याद रखें इस बार सेवइंया सिर्फ घर पर ही बनाएं।





बर्तनों का अच्छी तरह धोएं



त्यौहारों के मौके पर घर में भीड़भाड़ होना आम बात है। और जब बात हो ईद की तो त्यौहार पर चार चांद लग जाते हैं। ऐसे में इस दिन हम मेहमानों को जिन्हें भगवान का रूप कहा जाता है उन्हें जल्द से जल्द सेवइंया खिलाकर मुंह मीठा करवाना चाहते हैं। लेकिन इस चक्कर में हम बर्तनों को सही से साफ नहीं कर पाते। जिससे हम अपने मेहमानों को खुशियों के चक्कर में बीमारी भेंट कर देते हैं। ऐसे में इस बार बर्तनों को अच्छी तरह धोएं।

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