Tuesday, 5 July 2016

देश का 'भविष्य' खराब कर रहा है फास्ट फूड

आज के समय की भागदौड़ भरी जिंदगी में फास्ट फूड को लोगों की पहली पसंद कहें या मजबूरी, दोनों ही स्थितियों में यह जानलेवा है। आजकल अभिभावक खासतौर से बच्चों को स्कूल भेजते वक्त समय की कमी को आड़ बनाते हुए उन्हें फास्ट फूड देकर चलता कर देते हैं। जबकि परिजनों की इस लापरवाही का अंजाम बच्चें भुगतते हैं। आज स्थिति यह हो गई हो है कि हमारे देश में 5 साल की छोटी उम्र से ही बच्चों के पाचन तंत्र में दिक्कतें आने लगी हैं। जो उम्र बढ़ने के साथ लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में खराब डाइट के चलते 20 साल की उम्र तक आते-आते बच्चों का पाचन तंत्र पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो रहा हैं।


देश के प्रतिष्ठित अस्पताल एम्स द्वारा कराए गए सर्वे में पता चला है कि 6 से 17 साल तक की उम्र के बच्चें कई तरह से रोगी हैं। सरकारी स्कूल के बच्चों की अपेक्षा प्राईवेट स्कूल के बच्चों को फास्ट फूड की ज्यादा लत होती है। सर्वे के मुताबिक प्राईवेट स्कूलों में पड़ने वाले 35 फीसदी बच्चें बिमारियां से पीड़ित हैं। केरल के कोच्चि शहर में सीबीएसई बोर्ड के 6 से 17 साल की उम्र के 7,202 बच्चें ऐसे हैं जिन्हें काफी गंभीर बिमारियां हैं। सर्वे बताता है कि शहरी इलाकों में 6 फीसदी छात्र मोटापे के शिकार हैं, 12 फीसदी ओवरवेट हैं और 17.2 फीसदी अंडरवेट हैं। यह सर्वे वर्ष 2015 का है।


जब इन 7,202 बच्चों में से 4,799 बच्चों का ब्लड प्रेसर लेवल चेक किया गया तो बेहद चौंकाने वाले परिणाम सामने आए। 7,202 बच्चों में से 15.1 फीसदी बच्चे ऐसे हैं जिनका ब्लड प्रेसर हाई है। जबकि 15.1 फीसदी बच्चें ऐसे हैं जो हाई ब्ल्डप्रेसर की कगार पर हैं। वहीं, एम्स द्वारा 2005 में किए सर्वे में हर कक्षा में सिर्फ 2 छात्र मोटे और 6 छात्र ओवरवेट पाए गए थे। जबकि बीते 10 सालों में आज यह संख्या दोगुनी हो गई है।

इन बिमारियों से पीड़ित हैं बच्चें

आजकल 10 साल से 18 साल के बीच कई बच्चें ऐसे हैं जिन्हें माइग्रेन, पथरी, हाई ब्लड प्रेशर, लो ब्लड प्रेशर, शुगर, सिर दर्द, पेट दर्द, आखें कमजोर जैसी गंभीर बिमारियां हैं। इतना ही नहीं ज्यादा आॅयली और मिर्च मसाला खाने के चलते बच्चें बवासीर जैसी खतरनाक बिमारी से भी पीड़ित हैं।



क्या कहते हैं एक्सपर्ट ?


हेल्थ एक्सपर्टों का कहना है कि सिर्फ पौष्टिक आहार के अभाव के चलते आज बच्चों की यह दुर्दशा हो रही है। आजकल परिजन फास्ट फूड को बच्चों की पसंद मानकर और उनकी पलभर की खुशी के लिए उन्हें फास्ट फूड के दलदल में धकेल देते हैं। जब बच्चा फास्ट फूड का सेवन अधिक करने लगता है तो उसे घर का खाना फीका और बेस्वाद लगने लगता है। जबकि 18 साल की उम्र तक बच्चों को फास्ट फूड के बजाय ज्यादा से ज्यादा प्रोटीन, विटामिन और अच्छी डाइट की जरूरत होती है।



क्या होती है अच्छी डाइट ?

एक्सपर्टों कहते हैं बच्चों के दैनिक आहार में रोटी, 2 टाइम दाल, हरी सब्जियां 2 ग्लास दूध, 1 कटोरी दही, सलाद,  मौसमी फल, स्प्राउट्स, जूस होना अनिवार्य है। एक्सपर्ट यह भी कहते हैं कि बच्चों का भविष्य स्वस्थ और उज्जवल बनाने के लिए हमें बच्चों का मन फास्ट फूड से हटाना चाहिए और उन्हें हेल्थी चीजों की ओर आकर्षित करना चाहिए।

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