Thursday, 7 July 2016

योग से दूर होता है अलजाइमर, बढ़ती है याद्दाश्त



अलजाइमर भूलने की बीमारी उन रोगों में से एक है जिनके बारे में मरीज से पहले उसके परिवार या अन्य जान पहचाने के लोगों को महसूस होता है। क्योंकि यह बीमारी प्रारंभ में यह खुद को महसूस नहीं होती है। वो इसलिए क्योंकि अलजाइमर दिमाग की बिमारी है, और इसकी गिरफ्त में आते ही संबंधित व्यक्ति दीर्घकालीन के साथ साथ अपने रोजमर्रा के कामों से भी बेखबर होने लगता है। मौजूदा वक्त में हमारे देश में 21 लाख लोग अलजाइमर के रोगी हैं। हालांकि इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है। लेकिन निम्नलिखित लक्षण मिलने पर डॉक्टरी जांच अवश्य करानी चाहिए।

अलजाइमर के लक्षण
- खुद ही चीजों को रखकर भूलना
- एक ही बात को बार बार दोहराना
- खुद से बात करना
- जानी पहचानी जगहों या अपने ही घर में खो जाना
- रोजाना के आसान कामों को करने में भी दिक्कत महसूस होना
- देर रात को निकल कर घूमना
- बात करते वक्त सामने वाले व्यक्ति को घूरना
- काम ना करने पर भी ऐसा लगना कि वह काम हमने कर दिया है
- छोटी छोटी बातों पर चौंक जाना, आदि


उम्र बढ़ने के साथ होता है अलजाइमर
डॉक्टरों का मानना है कि 60 साल की उम्र के बाद अक्सर लोगों में अलजाइमर के लक्षण देखें जाते हैं। लेकिन अगर उनसे इस बारे में जिक्र करो तो वह इस बात से इंकार करते हैं।

क्यों होता है अलजाइमर
अलजाइमर होने का एक सबसे बड़ा कारण शारीरिक रूप से अस्वस्थ होना भी है। जो लोग कम उम्र में ही शारीरिक रूप से पीड़ित रहते हैं उनमें अलजाइमर होने के चांस ज्यादा होते हैं। क्योंकि ऐसे लोगों के मस्तिष्क तंतु वक्त से पहले ही सिकुड़ने लगते हैं। जबकि स्वस्थ लोगों के मस्तिष्क तंतु हमेशा स्वस्थ और क्रियाशील रहते हैं।


योग से दूर होता है अलजाइमर
वैसे तो हम पहले ही बता चुके हैं कि इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है लेकिन योग एक ऐसा माध्यम है जिसे निरंतर करने से इस बीमारी का हल निकाला जा सकता है। एक्सपर्टों का कहना है कि इस बीमारी को शुरुआत में पता लगते ही व्यायाम करना शुरू कर देना चाहिए। इतना ही नहीं निरंतर योग करने से याद्दाश्त भी बढ़ती है। अलजाइमर से ग्रसित मरीजों को दिन में कम से कम आधा घंटा योग करना चाहिए। 

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