Tuesday, 2 August 2016

#BreastFeeding: इस उम्र में म​हिलाएं कराती हैं 75% स्तनपान



इन दिनों अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेस्टफीडिंग की धूम मची हुई है। मां के दूध को वरीयता देने के लिए अगस्त माह का पहला सप्ताह ब्रेस्टफीडिंग के रूप में मनाया जाता है। देशभर में ब्रेस्टफीडिंग के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए जगह-जगह कैम्प लगे हुए हैं। कई जगहों पर महिलाएं अपने शिशुओं को पब्लिक प्लेस में ही ब्रेस्ट फीड करा रही हैं तो कई जगहों पर ब्रेस्ट फीड से शिशु और मां को होने वाले फायदों के पोस्टर लगाए गए हैं। इन सब के पीछे का मकसद सिर्फ महिलाओं को यह बताना है कि अपने बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग कराते वक्त उन्हें कहीं छिपने की जरूरत नहीं है बल्कि यह उनका संवैधानिक अधिकार है।

एक मां द्वारा अपने शिशु को ब्रेस्ट फीड कराना वो पल होता है जब एक महिला को खुद पर गर्व होता है। हालांकि आज के समय में महिलाएं अपना​ फिगर खराब होने जैसी भ्रांतियों के चलते अपने शिशुओं को ब्रेस्टफीड कराने से परहेज करती है। आज ब्रेस्टफीडिंग के दूसरे दिन हम आपको बताएंगे कि अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर महिलाएं किस उम्र में सबसे ज्यादा और किस उम्र में सबसे कम ब्रेस्टफीड कराती हैं। इसके साथ आइए जानते हैं ब्रेस्टफीडिंग के 10 चमत्कारिक फायदें।


1) मां को आती है अच्छी नींद
शायद आपको यह आजतक ​महसूस ना हुआ हो लेकिन यह ​सच है कि जब एक मां अपने शिशु को ब्रेस्टफीड कराती है तो उसके बाद उसे अच्छी नींद आती है। 'द जरनल आॅफ पैरिनेटल' की स्टडी के अनुसार रात को ब्रेस्टफीड कराने के बाद एक महिला 45 मिनट तक ज्यादा नींद लेती है।

2) खत्म होता है ब्रेस्ट कैंसर का खतरा
'हेल्थ फाउनडेशन बर्थ सेंटर' के मुताबिक अपने शिशु को दूध पिलाने से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा 25 प्रतिशत तक घट जाता है। जिंदगी भर ब्रेस्ट कैंसर से बचने के लिए अपने शिशु को अवश्य ब्रेस्ट फीड कराएं।


3) बचते हैं 80094.00 से 100147.50 रुपये
ब्रेस्टफीडिंग से मां और शिशु को तो कई तरह के फायदे होते ही हैं सबसे अच्छी चीज यह है कि ब्रेस्टफीड से आप लगभग 80094.00 से 100147.50 रुपये तक की सेविंग कर सकते हैं। क्योंकि जो महिलाएं अपने शिशुओं को दूध पिलाने से परहेज करती हैं वह रेडिमेड दूध, निप्पल, बोतल और फ्लेवर जैसी तमाम चीजों में हजारों रुपये खर्च कर देती हैं।

4) मां पर निर्भर है दूध का स्वाद
मां के दूध का स्वाद सिर्फ उसके खानपान पर निर्भर करता है। यानि कि मां अगर दूषित खानपान का सेवन करती है तो उसके दूध में अपेक्षाकृ​त कम पोषक तत्व होंगे और स्वाद भी अच्छा नहीं होगा। लेकिन अगर मां पौष्टिक आहार लेती है तो उसका दूध बेहद स्वादिष्ट होगा।


5) दाएं स्तन में आता है ज्यादा दूध
'हेल्थ फाउनडेशन बर्थ सेंटर' के मुताबिक 75 प्रतिशत महिलाओं के दाएं स्तन में बाएं स्तन की अपेक्षा अधिक दूध आता है। हालांकि दोनों की गुणवत्ता में कोई फर्क नहीं होता है।

6) 30 साल में 75% होती है ब्रेस्टफीडिंग
'सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन' की रिपोर्ट के ​मुताबिक 20 और इसके कम उम्र की युवतियां सिर्फ 43% ही ब्रेस्टफीड कराती हैं। वहीं 20 से 29 साल की उम्र की महिलाएं 65% ब्रेस्टफीड कराती हैं। जबकि 30 साल से अधिक की महिलाएं 75% ब्रेस्टफीडिंग कराती हैं।

7) शिशु को मिलते हैं अनगिनत लाभ
मां के दूध से शिशुओं को अनगिनत लाभ मिलते हैं। मां का दूध पीने वाले शिशु शारीरिक और मानिसिक दोनों तौर पर हमेशा स्वस्थ रहते हैं। मां का दूध पीने वाले बच्चे अपेक्षाकृत अधिक बुद्धिमान भी होते हैं। क्योंकि मां के दूध में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, विटामिन, आयरन, ओमेगा एसिड और कई अन्य पोषक तत्व मिलते हैं।


8) स्तन के आकार होते हैं बराबर
अक्सर महिलाओं को स्तनों के आकार को लेकर शिकायतें रहती हैं। ब्रेस्टफीड आपकी यह समस्या दूर करती हैं। ब्रेस्टफीड कराने वाली महिलाओं के दोनों स्तनों का आकार हमेशा एक समान रहता है।

9) बीमारी में भी कराते रहें ब्रेस्टफीड
बेबी सेंटर के मुताबिक अगर मां बुखार, वायरल, कोल्ड या किसी भी तरह की बीमारी से जूझ रही है तो वह उस स्थिति में भी शिशु को दूध पिला सकती है। मां के दूध से शिशु का इम्युन सिस्टम मजबूत होने के साथ ही बच्चा कई तरह की बीमारियों से लड़ जाता है।

10) हर मां के दूध की होती है अलग महक
क्या आप इस बात पर यकीन करेंगे कि हर महिला के स्तनों के दूध में एक अलग तरह की महक होती है। रोचक बात यह है कि सिर्फ 2 ​सप्ताह का बच्चा भी अपनी मां के दूध की खुशबू को पहचान लेता है।

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